अमेरिका के द्वारा भारत पर 50% का टैरिफ लगाया गया है। टैरिफ वार और ग्लोबल उथल-पुथल के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट दर्ज हो रही है। रुपया अपने रिकॉर्ड लो लेवल पर पहुंच चुका है। डॉलर के मुकाबले इंडियन करेंसी में 64 पैसे की गिरावट दर्ज हुई। जिसके बाद यह 88.27 रुपये प्रति डॉलर के लेवल पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। जिसके बाद यह लगभग 98 डॉलर के पास पहुंच गया।
इससे पहले रुपये में 18 पैसे की गिरावट दर्ज हुई थी, जिसके बाद यह 87.76 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इंटर बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 87.73 पर ओपन हुआ था। गुरुवार को यह 87.58 पैसे पर बंद हुआ था।
केवल डॉलर के मुकाबले ही नहीं बल्कि ऑफशोर चीनी युआन के मुकाबले भी रुपया अपने लोअर लेवल पर आ गया है। युआन के मुकाबले रुपया 12.33 युआन पर ट्रेड कर रहा है। इस महीने इसमें 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में इस साल अब तक तीन प्रतिशत गिरावट दर्ज हो चुकी है। इसके बाद एशिया की सबसे कमजोर करेंसी रुपया बन गया है।
क्यों आ रहा रुपये पर दबाव?रुपये पर दबाव के पीछे के कई कारण हैं। जैसे अमेरिका के द्वारा भारत पर लगाए गए 50% का टैरिफ और ग्लोबल उथल-पुथल आदि। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निदेशक भी बिकवाली कर रहे हैं, जिसके कारण और रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
रुपये में आ रही गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई के द्वारा डॉलर बेचे गए थे। जून महीने में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 4.83 अरब डॉलर की बिक्री तथा 1.16 अरब डॉलर की खरीदारी की थी। मई महीने में आरबीआई के द्वारा 1.76 अरब डॉलर की खरीदारी की गई थी। लेकिन इसके बाद फिर रुपए में गिरावट जारी है।
इससे पहले रुपये में 18 पैसे की गिरावट दर्ज हुई थी, जिसके बाद यह 87.76 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इंटर बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 87.73 पर ओपन हुआ था। गुरुवार को यह 87.58 पैसे पर बंद हुआ था।
केवल डॉलर के मुकाबले ही नहीं बल्कि ऑफशोर चीनी युआन के मुकाबले भी रुपया अपने लोअर लेवल पर आ गया है। युआन के मुकाबले रुपया 12.33 युआन पर ट्रेड कर रहा है। इस महीने इसमें 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में इस साल अब तक तीन प्रतिशत गिरावट दर्ज हो चुकी है। इसके बाद एशिया की सबसे कमजोर करेंसी रुपया बन गया है।
क्यों आ रहा रुपये पर दबाव?रुपये पर दबाव के पीछे के कई कारण हैं। जैसे अमेरिका के द्वारा भारत पर लगाए गए 50% का टैरिफ और ग्लोबल उथल-पुथल आदि। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निदेशक भी बिकवाली कर रहे हैं, जिसके कारण और रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
रुपये में आ रही गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई के द्वारा डॉलर बेचे गए थे। जून महीने में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने 4.83 अरब डॉलर की बिक्री तथा 1.16 अरब डॉलर की खरीदारी की थी। मई महीने में आरबीआई के द्वारा 1.76 अरब डॉलर की खरीदारी की गई थी। लेकिन इसके बाद फिर रुपए में गिरावट जारी है।
You may also like
मोदी के बाद कौन? 84% लोगों ने इस नेता के फेवर में दी अपनी राय, आखिर कौन होंगे मोदी के बाद प्रधानमंत्री?
T20 World Cup 2026 के लिए बीसीसीआई ने एमएस धोनी को मेंटर की भूमिका की पेशकश की, पढ़ें बड़ी खबर
अखिलेश यादव ने मुलाकात की लालू प्रसाद यादव से
जिस व्यक्ति के मोबाइल नंबर का अंतिम अंक होता है ये, उसके पास कभी पैसों की कमी नहीं होती!`
जम्मू और कश्मीर बादल फटने और भूस्खलन से जूझ रहा है: 128 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता